Tuesday, 2 December 2014

शबनमी दुनिया

जब हम दोनों साथ होंगे तो दोनों चलेंगे शबनमी दुनिया में,
जहाँ हर तरफ शबनम होगी,
और थोडी ठंड होगी ।

रातों को आग जला के बैठेंगे एकसाथ,
लबों से दो लफ्ज़ बाटेंगे, प्यार करते हुए एक दूजे की बाँहों में रात काटेंगे एकसाथ ।
ज़ज्बातों की कोई सीमा न होगी,
सांसों में सांसे समाई होंगी,
प्यार का एहसास इतना होगा उस शबनमी दुनिया में, की शरम और हया की कोई जगह न होगी ।

सवेरे जब सूरज की किरणें शबनम पें पड़ेंगी,
तो सात रंग का सतरंगी पेश करेंगी ।
मैं जाऊँगा उस सतरंगी से एक रंग ले आऊँगा ,
उस रंग को फूलों में डाल के तुम्हारी जुल्फों में वो फूल लगाऊँगा ।

रात को जब चाँद की चाँदनी पड़ेगी शबनम पे तो ऐसा लगेगा जैसे चाँदी की कालीन बिछा रखी हो ज़मीं पे,
मुझे अपनी गोद में लेटा के तुम ऐसे चूमना,
जैसे दो सूखे होटों को पानी मिला हो यहीं पे ।

बोलो जब साथ होंगे हम तो चलोगी ना शबनमी दुनिया में,
जहाँ ये सब होगा, हम साथ होंगे, हर ख्वाब हमारे पूरे होंगे,
बोलो चलोगी ना शबनमी दुनिया में ?

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2 comments:

  1. Aaj mujhe yakeen ho gya ki... Teri kalpana ka aant nhi hai..... ACCHA hua tune KALAM pakad li warna ek HASTI doob jati jo ab chamkegi...... Is jahan mai...

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  2. Haha bhai thank u soo mch . Bs tu pyar brsa te reh apna fir sb thk ho jayega :)

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