सस्ती सी वो मस्ती चली गई,
जरा सी थी जो, वो हस्ती चली गई ।
विरानों में फिरते हैं अब,
मदरसे की वो बस्ती चली गई ।
यारों कि बज्म़ में जो लगते थे ठहाके और मिलती थीं गालियाँ,
अब तो वो ठहाके और गालियों की कश्ती भी चली गई ।
मदरसे- Schl, बज्म़ - mehfil
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जरा सी थी जो, वो हस्ती चली गई ।
विरानों में फिरते हैं अब,
मदरसे की वो बस्ती चली गई ।
यारों कि बज्म़ में जो लगते थे ठहाके और मिलती थीं गालियाँ,
अब तो वो ठहाके और गालियों की कश्ती भी चली गई ।
मदरसे- Schl, बज्म़ - mehfil
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वाह भाई... मज़ा आ गया।।
ReplyDeleteबहुत खूब।।
Thank u soo mch Vasu bhaiya apna time dene k liye
ReplyDeleteNd acha lga uske liye bhi dhanyavad :)