Thursday, 18 December 2014

सोचा ना था

सदायें चींखे बन जाएँगी सोचा ना था,
जो नन्हे फरिश्ते अमर थे, ताबूत में दफ़न हो जायेंगे सोचा ना था ।

जगमगाते थे जो घर कल तक मासूमियत भरी मुस्कानों से,
एक झटके में उन घरों के चिराग भुज जायेंगे सोचा ना था ।

शायद खुदा से कोई भूल हुई जो हैवान इल्म के दरवाज़े तक चले आये,
जिन सहीफ़ों पे चढ़नी थी सियाही आने वाले  कल की,
उनपे खून की छींटे होंगी सोचा ना था ।

शर्मसार हूं मैं आज इंसानी कौम कहलाने पे,
इतनी हैवानियत होगी हम में से किसी में सोचा ना था ।

एक आसमां था हुमाओं से भरा कल तक,
आज वही आसमां खाली होगा सोचा न था।

हुमाओं - खुशियां लाने वाली चिड़ियाँ
सहीफ़ों - किताबें




Picture credit: C R Sasikumar ( Indian Express)

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Wednesday, 3 December 2014

सस्ती सी वो मस्ती चली गई,
जरा सी थी जो, वो हस्ती चली गई ।

विरानों में फिरते हैं अब,
मदरसे की वो बस्ती चली गई ।

यारों कि बज्म़ में जो लगते थे ठहाके और मिलती थीं गालियाँ,
अब तो वो ठहाके और गालियों की कश्ती भी चली गई ।

मदरसे- Schl, बज्म़ - mehfil

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Tuesday, 2 December 2014

शबनमी दुनिया

जब हम दोनों साथ होंगे तो दोनों चलेंगे शबनमी दुनिया में,
जहाँ हर तरफ शबनम होगी,
और थोडी ठंड होगी ।

रातों को आग जला के बैठेंगे एकसाथ,
लबों से दो लफ्ज़ बाटेंगे, प्यार करते हुए एक दूजे की बाँहों में रात काटेंगे एकसाथ ।
ज़ज्बातों की कोई सीमा न होगी,
सांसों में सांसे समाई होंगी,
प्यार का एहसास इतना होगा उस शबनमी दुनिया में, की शरम और हया की कोई जगह न होगी ।

सवेरे जब सूरज की किरणें शबनम पें पड़ेंगी,
तो सात रंग का सतरंगी पेश करेंगी ।
मैं जाऊँगा उस सतरंगी से एक रंग ले आऊँगा ,
उस रंग को फूलों में डाल के तुम्हारी जुल्फों में वो फूल लगाऊँगा ।

रात को जब चाँद की चाँदनी पड़ेगी शबनम पे तो ऐसा लगेगा जैसे चाँदी की कालीन बिछा रखी हो ज़मीं पे,
मुझे अपनी गोद में लेटा के तुम ऐसे चूमना,
जैसे दो सूखे होटों को पानी मिला हो यहीं पे ।

बोलो जब साथ होंगे हम तो चलोगी ना शबनमी दुनिया में,
जहाँ ये सब होगा, हम साथ होंगे, हर ख्वाब हमारे पूरे होंगे,
बोलो चलोगी ना शबनमी दुनिया में ?

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इस जगमगाती रोशनी में मुझे एक अँधेरा दिखता है, मुझे दिखता है वो शख्स जो बस रातों में बिकता है. पहले से बँटे   मेरे इस वतन को और बा...