Tuesday, 4 November 2014

ख्यालों की कहानी

सुनो एक कहानी मुझ अजन्मी जान की ज़ुबानी ,
रहती हूँ मैं अपनी माँ की महफूज़ कोख मैं ,
मैं किस्मत वाली हूँ, वरना कई मार देते हैं हमें बस अपनी कुंद सोच से .

कई ख्याल आते हैं मेरे मासूम मन में,
कि क्या देगी ये दुनिया मुझे मेरे आने वाले जीवन में .
माँ कहती हैं कई बार मुझसे बातें करते वक्त की तुझे चौकन्ना रहना होगा,
अपनी हिम्मत खुद ही बनना होगा .

बाहर आते ही जैसे - जैसे तू बड़ी होगी,
सबकी नज़रें हर वक्त फिर तुझपे गढ़ी होंगी .
तू क्या पहनेगी,
कहाँ से आयेगी और कब जायेगी,
अपने दिल की सुनेगी या फिर उन नज़रों के डर से गुम हो जायेगी .

तुझे पढ़ना होगा,
अपने और कईयों के जीवन को रोशन करना होगा .

माँ हर रात मुझसे बातें करती हैं ,
वो कहती हैं फिर एक वक्त आएगा जब तुझे सही हमसफर चुनना होगा .
कई ऐसे हाथ होंगे जो बस तेरी इज्जत को छूना चाहेंगे ,
उन हाथों में एक वो  हाथ भी होगा जो इज्जत करना जानता होगा .
तुझे उस हाथ को हमसफर बनाना है,
अपनी जिंदगी में कई रूपों को निभाने के साथ अपनी खुद की पहचान और नाम को कमाना है .

तू कभी माँ बनेगी,
कभी सिंदूरी,
कभी राखी बनेगी,
तो कभी नटखट दोस्त .
जो भी बनना बस अपना गर्व बनाये रखना,
खुद में प्यार, सबृ और शक्ती का संतुलन बनाये रखना .
बस यही कहानी है मेरी इतने सारे ख्यालों की,
बस गुजारिश है इस अजन्मी जान कि,
की मैं खुशियां देने वाली परी हूँ,
जीवन देने वाली जान,
मेरे जन्म लेने पे खुश हो जाओ,
लड़खड़ाऊँ तो सहारा बन जाओ,
बदले में इतना प्यार दूँगी,
की मुझसे दुनिया और खूबसूरत लगेगी .

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